Sunday, July 6, 2008

फूलों की वफ़ा


चिट्ठाजगत अधिकृत कड़ी
- इन्सान को गुलाब के उस फूल की तरह होना चाहिए जो उसे मसलकर फ़ेक देने वाले हाथो में खुशबु महकाता रहे
- फूल और काटे इन्सान ख़ुद अपनी राहों में बिछाता है और दुसरो को इल्जाम देता है
- खुश कलामी यानी अच्छे बोल ऐसे फूल है जो कभी नही मुरजाते
- अगर वफ़ा सीखनी है तो फूलों से सीखो जो पोधों से जुदा होते ही मुरजा जाते है
- खुशी के फूलों को ज्यादा मत सूंघो वरना उनसे गमो का रस टपकने लगेगा
- जिंदगी एक फूल है और मोह्बत उसकी खुशबू
- जिंदगी उस फूल का नाम है जो खिलकर मुरजा जाते है
- बूढा आदमी बरगद का पेड़ है जो छोटों को छाया देता है
जवान इन्सान फूलदान दरख्त है जो कमाता खिलाता है
लेकिन बच्चा फूल के मानिन्द है जिसे देखकर सभी को खुशी मिल सकती है

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