Saturday, April 18, 2009

कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती

कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती


लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती,

कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती ।

नन्हीं चींटी जब दाना लेकर चलती है,

चढ़ती दीवारों पर, सौ बार फिसलती है ।

मन का विश्वास रगों में साहस भरता है,

चढ़कर गिरना, गिरकर चढ़ना न अखरता है ।

आख़िर उसकी मेहनत बेकार नहीं होती,

कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती ।




डुबकियां सिंधु में गोताखोर लगाता है,

जा जा कर खाली हाथ लौटकर आता है ।

मिलते नहीं सहज ही मोती गहरे पानी में,

बढ़ता दुगना उत्साह इसी हैरानी में ।

मुट्ठी उसकी खाली हर बार नहीं होती,

कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती ।



असफलता एक चुनौती है, इसे स्वीकार करो,

क्या कमी रह गई, देखो और सुधार करो ।

जब तक न सफल हो, नींद चैन को त्यागो तुम,

संघर्ष का मैदान छोड़ कर मत भागो तुम ।

कुछ किये बिना ही जय जय कार नहीं होती,

कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती ।


सूर्यकांत त्रिपाठी "निराला"




Sunday, April 12, 2009

आग जलनी चाहिए

आग जलनी चाहिए



हो गई है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए
इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए

आज यह दीवार, परदों की तरह हिलने लगी,
शर्त लेकिन थी कि ये बुनियाद हिलनी चाहिए

हर सड़क पर, हर गली में, हर नगर, हर गाँव में
हाथ लहराते हुए हर लाश चलनी चाहिए

सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं,
सारी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए

मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही
हो कहीं भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए।

Monday, February 23, 2009

जय हो.... बात बाकी

जय हो.... बात बाकी




ऐ आर रहमान ने जय हो गाने के लिए दो ओस्कर अवार्ड जीते | इसके लिए हर भारतवासी को उनपर गर्व होना चाहिए | आज देश की शान ऊपर हो गयी खेल में अवार्ड्स जितने के बाद आज हर भारतीय का सपना पुरा हो गया लेकिन एक सवाल फिर खड़ा हो गया| क्या जय हो...... सोंग (फ़िल्म स्लमडोग करोड़पति) ऐ आर रहमान का बेस्ट सोंग है |
ऐ आर रहमान के दुसरे गाने जैसे
छोटी सी आशा मस्ती भरे मन में जीने की आशा, रूबरू(रंग दे बसंती ), ओ पालनहारे सबगुण ओ न्यारे(लगान), खाव्जा मेरे खाव्जा (जोधा अकबर), मंगल मंगल हो (मंगल पांडे ), चल छैया चल छैया (दिल से), हम्मा हम्मा (बॉम्बे ) सभी सोंग्स जय हो को बराबर टक्कर देने वाले है | अगर छोटी सी आशा मस्ती भरे मन में जीने की आशा को आस्कर मिलता तो आज तक कम से कम दस अवार्ड हमारी झोली में होते |यह एक विचारनीय प्रश्न है की क्या अगर स्लम डोग करोड़ पति केवल हिन्दी में पदर्शित होती तो शायद हम एक भी अवार्ड नही जित पाते या फिर ओस्कर वाले केवल अंग्रेजी में बनी फिल्म्स को ज्यादा प्राथमिकता देते है | या फिर ऑस्कर सही मायने में फ़िल्म जगत का बेस्ट अवार्ड नही है क्योकि इसमे पुरे विश्व की फिल्म्स को बराबर प्राथमिकता नही दी जाती है |

Sunday, September 7, 2008

अवसर

एक बार एक आदमी एक चित्रचाला में गया| उसने वहा कई मनोरम चित्र देखे| परन्तु एक चित्र को देखकर उसे बड़ा आश्चर्य हुआ| उसने देखा चित्र में जो दिखाई दे रहा था| उसका चेहरा बालो से ढका हुआ था, तथा पेरो में पंख लगे हुए थे| तब उसने चित्रकार से पूछा :
यह कीसका चित्र है |
तब चित्रकार बोला - अवसर का
आदमी बोला - अवसर का| लेकीन इसका चेहरा क्यो ढका हुआ है
चित्रकार ने उत्तर दीया - क्योकी जब यह आता है तो हम अपनी लापरवाही के कारण इसे पहचान नही पाते है
आदमी ने पूछा -परन्तु इसके पेरो में पंख क्यो लगे हुए है|
चित्रकार बोला- क्योकी एक बार आने के बाद यह उड़ जाता है तथा लोटकर फीर कभी नही आता है|

Monday, July 21, 2008

आज के स्नातक ........

मै बी. ऐ. पास हूँ
बकरिया चराता हू ,
दूध होता है बकरियों का
जनता को भैस का कहकर पिलाता हू
मै सबसे ज्यादा कमाता हू

मै एम. बी. बी.एस. पास हू
प्राइवेट क्लीनिक चलाता हू
दवा के बहाने चूने की गोलिया खिलाता हू
मै सबसे ज्यादा कमाता हू

मै बी .कॉम. पास हू
फाइनेंस कंपनी चलाता हू
दो वर्षो मे दो गुना धन देने का वादा कर
धन इकठ्ठा होते ही फरार हो जाता हू
मै सबसे ज्यादा कमाता हू

मै एम. सी. ऐ. पास हू
सॉफ्टवेर डेवलप करता हू
"गूगल " पर विश्वास करता हू
"कट", "कॉपी" , "पेस्ट" करता हू
मै सबसे ज्यादा कमाता हू

मै अंगूठा छाप हू (नेता)
कोई पत्र भी आ जाए तो दुसरो से पढ़वाता हू
मै सिर्फ़ शब्द जाल से
जनता को उल्लू बनाता हू
मै सबसे ज्यादा कमाता हू । ।

Vote for me now!

मेरे विचार

  • इतना नर्म भी न बनो की कोई तुम्हे निचोड़ ले
  • इतना गर्म भी न बनो की कोई तुम्हे छू भी न सके
  • इतना सीधा भी न बनो की तुम्हारा मजाक उडाया जाए
  • इतने टेढे भी न बनो की कोई तुमसे बात करने में कतराए
  • इतने आशावान भी न बनो की निराशा सह न सके
  • इतना प्यार भी न करो की कोई तुम्हारे प्यार से कतराए
  • इतने ज्यादा भी न बोलो की कोई तुम्हे सुन न सके
  • इतने कम भी न बोलो की तुम्हे मूर्ख समझा जाए


दोस्ती ...


चिट्ठाजगत अधिकृत कड़ी"><span title=चिट्ठाजगत अधिकृत कड़ी" title="चिट्ठाजगत अधिकृत कड़ी" border="0">

दोस्ती गजल है , गुनगुनाने के लिए

दोस्ती नगमा है , सुनाने के लिए

ये वो जज्बा है , जो सबको नही मिलता

क्योकि होसला चाहिये , दोस्ती निभाने के लिए

दोस्ती होती नही , दोस्तों का दिल दुखाने के लिए

बल्कि दोस्ती तो होती है , दोस्तों के जज्बात को समजने का लिए

और अपनी जान बचाने के लिए

क्योकि दोस्ती तो होती है , दोस्तों पर जान लुटाने के लिए