
जो हताश है , उदासीन है , उनसे अनुरोध करूँगा में
केवल आशा के बल पर , सारा संसार चला करता है
जिसे डूबने से डर लगता है , उसे तेरना कब आता है
मोती उसे ही मिलते है , जो गहरे गोते खाता है
विशवाशो का हर गुलाब , सासों के बीच खिला करता है
केवल आशा के बल पर , सारा संसार चला करता है
नही मागने से हक मिलता , हर हक प्राप्त किया जाता है
हर मरना है उस जीवन को योगी कवि जिया करता है
संगर्सो के कदमो को , मंजिल का पता चला करता है
केवल आशा के बल पर , सारा संसार चला करता है
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